पंजाब के आठ नगर निगमों में मेयर चुनाव की उल्टी गिनती शुरू, राजनीतिक गतिविधियां तेज
Countdown to mayoral elections in Punjab
चंडीगढ़। Countdown to mayoral elections in Punjab, पंजाब के आठ प्रमुख नगर निगमों में मेयर चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। सात नगर निगमों के लिए मेयर का पद सामान्य वर्ग और एक के लिए रिजर्व किया गया है। राज्य निर्वाचन प्राधिकरण और स्थानीय निकाय विभाग की ओर से जारी आदेशों के बाद अब जल्द ही अमृतसर, जालंधर, लुधियाना, बठिंडा, कपूरथला, मोगा, पटियाला और मोहाली नगर निगमों में मेयर का चुनाव कराया जाएगा।
चुनाव से पहले जारी अधिसूचना ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि इस बार सभी आठ नगर निगमों में मेयर का पद सामान्य (ओपन) श्रेणी के लिए आरक्षित रहेगा। पंजाब रिजर्वेशन ऑफ द ऑफिसेज ऑफ मेयर्स ऑफ म्यूनिसिपल कॉरपोरेशंस रूल्स, 2017 के तहत आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनावी प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया गया है।
इसके साथ ही नगर निगमों में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। विभिन्न दलों ने अपने-अपने पार्षदों को एकजुट रखने और मेयर पद पर कब्जा जमाने की रणनीति बनानी शुरू कर दी है।
बुलाई जाएगी विशेष बैठक
जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार मेयर का चुनाव सामान्य निगम बैठक में नहीं बल्कि विशेष बैठक बुलाकर कराया जाएगा। चुनाव की अध्यक्षता सरकार की ओर से नियुक्त प्राधिकृत अधिकारी करेंगे। बैठक में सबसे पहले मेयर पद के लिए नामांकन लिए जाएंगे, जिसके बाद मतदान की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी।
यदि केवल एक उम्मीदवार मैदान में रहता है तो उसे निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया जा सकता है, जबकि एक से अधिक उम्मीदवार होने की स्थिति में मतदान कराया जाएगा। चुनाव प्रक्रिया को लेकर विस्तृत नियम भी तय किए गए हैं।
मतदान में केवल पार्षद लेंगे भाग
मतदान के दौरान केवल निगम पार्षद ही भाग ले सकेंगे और पूरी कार्यवाही पंजाब म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन एक्ट, 1976 तथा पंजाब म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर एवं डिप्टी मेयर इलेक्शन रूल्स, 1991 के तहत संचालित होगी। चुनाव के दौरान एसडीएम और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और नियमों के अनुरूप संपन्न हो।
नियमों में गणपूर्ति (क्वोरम) का भी विशेष प्रावधान रखा गया है। आवश्यक संख्या में पार्षदों की उपस्थिति के बिना बैठक की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकेगी। यदि किसी कारण से पहली बैठक में चुनाव नहीं हो पाता या गणपूर्ति पूरी नहीं होती तो नियमों के अनुसार अगली बैठक बुलाने और चुनाव संपन्न कराने की व्यवस्था की गई है।
आंकड़ों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं
राजनीतिक दृष्टि से यह चुनाव बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। नगर निगम चुनावों के बाद अब मेयर पद को लेकर दलों के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिलेगा। कई निगमों में बहुमत के आंकड़े को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, ऐसे में निर्दलीय और छोटे दलों के पार्षदों की भूमिका भी निर्णायक बन सकती है।
मेयर चुनाव के नतीजे न केवल नगर निगमों की सत्ता की तस्वीर तय करेंगे, बल्कि आने वाले समय में शहरी राजनीति और स्थानीय निकायों के राजनीतिक समीकरणों की दिशा भी निर्धारित करेंगे।